महलों के बाशिंदों ने कब बाहर ये देखा है बस्ती की पगडंडी पर कितने आदम पड़े हुए हैं जिन जिन लोगों ने शिरकत की है मेरी मय्यत में देखोगे तो जानोगे सब बन्दे मरे हुए हैं
Related Sher
मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
314 likes
न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
Bashir Badr
57 likes
ये जो है फूल हथेली पे इसे फूल न जान मेरा दिल जिस्म से बाहर भी तो हो सकता है
Abbas Tabish
62 likes
पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे मैं जंगल में पानी लाया करता था
Tehzeeb Hafi
56 likes
हर दुख का है इलाज, उसे देखते रहो सब कुछ भुला के आज उसे देखते रहो देखा उसे तो दिल ने ये बे-साख़्ता कहा छोड़ो ये काम काज उसे देखते रहो
Aslam Rashid
55 likes
More from Saahir
उस की दीवार पे तस्वीर बना रक्खी थी मैं ने ख़ुद पाँव की ज़ंजीर बना रक्खी थी लिखते रहने से मेरा ख़ून निकल आया था उस ने काग़ज़ पे भी शमशीर बना रक्खी थी
Saahir
1 likes
उस की अच्छी बुरी आदतें सारी मालूम हैं मुझ को साहिर चाँदनी संग मैं दाग़ भी मेरे महताब में देखता हूँ
Saahir
1 likes
ये समझ में आ गया बेरोज़गारी के दिनों में पैसा है अपनी जगह और दोस्ती अपनी जगह पर
Saahir
1 likes
उस का नाम सुनाई देने की वजह मेरे पड़ोस की छोटी बच्ची है दोस्त मेरे ख़यालों में ही पक्कापन है मेरी उम्र अभी भी कच्ची है दोस्त
Saahir
1 likes
कोई है ही नहीं मेरे जैसा बात गर बे-वफ़ाई पे आए
Saahir
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Saahir.
Similar Moods
More moods that pair well with Saahir's sher.







