मैं आज कर रहा हूँ ये एलान साहिबा दरबार-ए-दिल की आप ही हो शान साहिबा मैं आप के इलावा किसी और का नहीं इतना हुआ न करिए परेशान साहिबा
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं सब के दिल से उतर गया हूँ मैं
Jaun Elia
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी
Bhuwan Singh
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किसी से बन गया है रिश्ता उस तन का नज़र आने लगा है दाग़ गर्दन का हक़ीक़त मान लूँ इन क़समों को कैसे यक़ीं कैसे करूँ मैं अपनी दुल्हन का
Bhuwan Singh
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मुझ पे तेरी नज़र उठेगी कब और तू इस तरफ़ बढ़ेगी कब ओ गुलाबों को चूमने वाली इन लबों पर धियान देगी कब
Bhuwan Singh
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शौक़ अच्छा नहीं दवा का भी नाम लेते रहो ख़ुदा का भी तुम मोहब्बत में हार जाओगे इश्क़ है खेल बे-वफ़ा का भी
Bhuwan Singh
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ज़िंदगी ही नहीं चलती किसी आदत के बिना इस लिए हम नहीं रह पाते मोहब्बत के बिना दुनिया से भी परे लगता है हमें उस का नूर या'नी रब मिल गया है हम को इबादत के बिना
Bhuwan Singh
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