sherKuch Alfaaz

मैं आज कर रहा हूँ ये एलान साहिबा दरबार-ए-दिल की आप ही हो शान साहिबा मैं आप के इलावा किसी और का नहीं इतना हुआ न करिए परेशान साहिबा

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वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी

Bhuwan Singh

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किसी से बन गया है रिश्ता उस तन का नज़र आने लगा है दाग़ गर्दन का हक़ीक़त मान लूँ इन क़समों को कैसे यक़ीं कैसे करूँ मैं अपनी दुल्हन का

Bhuwan Singh

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मुझ पे तेरी नज़र उठेगी कब और तू इस तरफ़ बढ़ेगी कब ओ गुलाबों को चूमने वाली इन लबों पर धियान देगी कब

Bhuwan Singh

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शौक़ अच्छा नहीं दवा का भी नाम लेते रहो ख़ुदा का भी तुम मोहब्बत में हार जाओगे इश्क़ है खेल बे-वफ़ा का भी

Bhuwan Singh

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ज़िंदगी ही नहीं चलती किसी आदत के बिना इस लिए हम नहीं रह पाते मोहब्बत के बिना दुनिया से भी परे लगता है हमें उस का नूर या'नी रब मिल गया है हम को इबादत के बिना

Bhuwan Singh

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