sherKuch Alfaaz

वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

Tehzeeb Hafi

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं

Jaun Elia

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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा

Bashir Badr

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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

Ahmad Faraz

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ज़िंदगी ही नहीं चलती किसी आदत के बिना इस लिए हम नहीं रह पाते मोहब्बत के बिना दुनिया से भी परे लगता है हमें उस का नूर या'नी रब मिल गया है हम को इबादत के बिना

Bhuwan Singh

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मैं आज कर रहा हूँ ये एलान साहिबा दरबार-ए-दिल की आप ही हो शान साहिबा मैं आप के इलावा किसी और का नहीं इतना हुआ न करिए परेशान साहिबा

Bhuwan Singh

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रूह को अंदर से पहले ख़ूब झिंझोड़ा गया फिर मिरा हर ख़्वाब मेरे सामने तोड़ा गया हश्र कुछ ऐसा हुआ है मेरे इस किरदार का क़िस्तों में तोड़ा गया फिर रिश्तों में छोड़ा गया

Bhuwan Singh

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हर इक मुआमले में तू मुझे कमाल लगा तो तुझ सेे मिल के मुझे अच्छा अपना हाल लगा यूँँ छोड़ दे तेरा एहसास इश्क़ से मुझ पर तू अपने हाथों से इन गालों पे गुलाल लगा

Bhuwan Singh

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किसी से बन गया है रिश्ता उस तन का नज़र आने लगा है दाग़ गर्दन का हक़ीक़त मान लूँ इन क़समों को कैसे यक़ीं कैसे करूँ मैं अपनी दुल्हन का

Bhuwan Singh

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