sherKuch Alfaaz

रूह को अंदर से पहले ख़ूब झिंझोड़ा गया फिर मिरा हर ख़्वाब मेरे सामने तोड़ा गया हश्र कुछ ऐसा हुआ है मेरे इस किरदार का क़िस्तों में तोड़ा गया फिर रिश्तों में छोड़ा गया

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वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी

Bhuwan Singh

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सुधरने के लिए इक और साल लेना है ये इश्क़ दिल से मगर अब निकाल लेना है मेरे हो तुम यही बस सोच कर जिया अब तक अब आगे ऐसा ही इक वहम पाल लेना है

Bhuwan Singh

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रातभर रोता रहूँ ऐसा बहाना चाहिए था यार मुझ को बस मोहब्बत में ठिकाना चाहिए था जो उतर जाए मोहब्बत में उसी की मौत होगी यार ये सब मौत से पहले बताना चाहिए था

Bhuwan Singh

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मुझ पे तेरी नज़र उठेगी कब और तू इस तरफ़ बढ़ेगी कब ओ गुलाबों को चूमने वाली इन लबों पर धियान देगी कब

Bhuwan Singh

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मैं आज कर रहा हूँ ये एलान साहिबा दरबार-ए-दिल की आप ही हो शान साहिबा मैं आप के इलावा किसी और का नहीं इतना हुआ न करिए परेशान साहिबा

Bhuwan Singh

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