sherKuch Alfaaz

सुधरने के लिए इक और साल लेना है ये इश्क़ दिल से मगर अब निकाल लेना है मेरे हो तुम यही बस सोच कर जिया अब तक अब आगे ऐसा ही इक वहम पाल लेना है

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ज़िंदगी ही नहीं चलती किसी आदत के बिना इस लिए हम नहीं रह पाते मोहब्बत के बिना दुनिया से भी परे लगता है हमें उस का नूर या'नी रब मिल गया है हम को इबादत के बिना

Bhuwan Singh

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वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी

Bhuwan Singh

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मैं मोहब्बत को अगर दोस्त से बढ़कर कहता हाल यूँँ होता कि मैं मय-कदे को घर कहता फिरता रह जाता मैं यूँँ उस के ही आगे पीछे देखता कोई अगर मुझ को तो नौकर कहता

Bhuwan Singh

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कोई सज़ा सुना ही न पाए मेरे लिए कानून ऐसा कोई बनाए मेरे लिए

Bhuwan Singh

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किसी से बन गया है रिश्ता उस तन का नज़र आने लगा है दाग़ गर्दन का हक़ीक़त मान लूँ इन क़समों को कैसे यक़ीं कैसे करूँ मैं अपनी दुल्हन का

Bhuwan Singh

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