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कोई सज़ा सुना ही न पाए मेरे लिए कानून ऐसा कोई बनाए मेरे लिए

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वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी

Bhuwan Singh

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सुधरने के लिए इक और साल लेना है ये इश्क़ दिल से मगर अब निकाल लेना है मेरे हो तुम यही बस सोच कर जिया अब तक अब आगे ऐसा ही इक वहम पाल लेना है

Bhuwan Singh

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शौक़ अच्छा नहीं दवा का भी नाम लेते रहो ख़ुदा का भी तुम मोहब्बत में हार जाओगे इश्क़ है खेल बे-वफ़ा का भी

Bhuwan Singh

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रोज़ टूट जाता है एक ख़्वाब रातों में और कुछ नहीं होता इन ख़राब रातों में बस कभी कभी ये ग़म हम गटक नहीं पाते इस लिए तो पीते हैं जी शराब रातों में

Bhuwan Singh

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रातभर रोता रहूँ ऐसा बहाना चाहिए था यार मुझ को बस मोहब्बत में ठिकाना चाहिए था जो उतर जाए मोहब्बत में उसी की मौत होगी यार ये सब मौत से पहले बताना चाहिए था

Bhuwan Singh

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