ज़िंदगी ही नहीं चलती किसी आदत के बिना इस लिए हम नहीं रह पाते मोहब्बत के बिना दुनिया से भी परे लगता है हमें उस का नूर या'नी रब मिल गया है हम को इबादत के बिना
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शौक़ अच्छा नहीं दवा का भी नाम लेते रहो ख़ुदा का भी तुम मोहब्बत में हार जाओगे इश्क़ है खेल बे-वफ़ा का भी
Bhuwan Singh
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मेरी इन आँखों से हर अश्क उतारने के लिए बस इक ही ग़म लगा 'उम्रें गुज़ारने के लिए कई लिबास मेरे पास हैं सँवरने को मगर मिला नहीं कुछ मन सँवारने के लिए
Bhuwan Singh
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कह दूँ तो छोड़ आए वो गुलशन मेरे लिए इतना करेगा कौन ख़ुसूसन मेरे लिए हुस्न-ए-गुल-ए-चमन पे ठहर जाए आफ़ताब साया-ए-गुल ही तो है नशेमन मेरे लिए
Bhuwan Singh
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सुधरने के लिए इक और साल लेना है ये इश्क़ दिल से मगर अब निकाल लेना है मेरे हो तुम यही बस सोच कर जिया अब तक अब आगे ऐसा ही इक वहम पाल लेना है
Bhuwan Singh
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मैं मोहब्बत को अगर दोस्त से बढ़कर कहता हाल यूँँ होता कि मैं मय-कदे को घर कहता फिरता रह जाता मैं यूँँ उस के ही आगे पीछे देखता कोई अगर मुझ को तो नौकर कहता
Bhuwan Singh
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