मेरी इन आँखों से हर अश्क उतारने के लिए बस इक ही ग़म लगा 'उम्रें गुज़ारने के लिए कई लिबास मेरे पास हैं सँवरने को मगर मिला नहीं कुछ मन सँवारने के लिए
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अपने दिल में बसाओगे हम को और गले से लगाओगे हम को हम नहीं इतने प्यार के क़ाबिल तुम तो पागल बनाओगे हम को
Abrar Kashif
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी
Bhuwan Singh
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मैं मोहब्बत को अगर दोस्त से बढ़कर कहता हाल यूँँ होता कि मैं मय-कदे को घर कहता फिरता रह जाता मैं यूँँ उस के ही आगे पीछे देखता कोई अगर मुझ को तो नौकर कहता
Bhuwan Singh
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ज़िंदगी ही नहीं चलती किसी आदत के बिना इस लिए हम नहीं रह पाते मोहब्बत के बिना दुनिया से भी परे लगता है हमें उस का नूर या'नी रब मिल गया है हम को इबादत के बिना
Bhuwan Singh
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सुधरने के लिए इक और साल लेना है ये इश्क़ दिल से मगर अब निकाल लेना है मेरे हो तुम यही बस सोच कर जिया अब तक अब आगे ऐसा ही इक वहम पाल लेना है
Bhuwan Singh
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कह दूँ तो छोड़ आए वो गुलशन मेरे लिए इतना करेगा कौन ख़ुसूसन मेरे लिए हुस्न-ए-गुल-ए-चमन पे ठहर जाए आफ़ताब साया-ए-गुल ही तो है नशेमन मेरे लिए
Bhuwan Singh
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