मुझ पे तेरी नज़र उठेगी कब और तू इस तरफ़ बढ़ेगी कब ओ गुलाबों को चूमने वाली इन लबों पर धियान देगी कब
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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शौक़ अच्छा नहीं दवा का भी नाम लेते रहो ख़ुदा का भी तुम मोहब्बत में हार जाओगे इश्क़ है खेल बे-वफ़ा का भी
Bhuwan Singh
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ज़िंदगी ही नहीं चलती किसी आदत के बिना इस लिए हम नहीं रह पाते मोहब्बत के बिना दुनिया से भी परे लगता है हमें उस का नूर या'नी रब मिल गया है हम को इबादत के बिना
Bhuwan Singh
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वो एक लड़की मुझे लोरियाँ सुनाती थी मुझे भी उस की ही बाहों में नींद आती थी मैं अर्सों पहले बस उस के लिए धड़कता था वो अर्सों पहले मुझे अपना दिल बुलाती थी
Bhuwan Singh
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रोज़ टूट जाता है एक ख़्वाब रातों में और कुछ नहीं होता इन ख़राब रातों में बस कभी कभी ये ग़म हम गटक नहीं पाते इस लिए तो पीते हैं जी शराब रातों में
Bhuwan Singh
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रूह को अंदर से पहले ख़ूब झिंझोड़ा गया फिर मिरा हर ख़्वाब मेरे सामने तोड़ा गया हश्र कुछ ऐसा हुआ है मेरे इस किरदार का क़िस्तों में तोड़ा गया फिर रिश्तों में छोड़ा गया
Bhuwan Singh
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