मैं चोट कर तो रहा हूँ हवा के माथे पर मज़ा तो जब था कि कोई निशान भी पड़ता
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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सहर की आस लगाए हुए हैं वो कि जिन्हें कमान-ए-शब से चले तीर की ख़बर भी नहीं
Abhishek shukla
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सफ़र के बा'द भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए ख़याल ओ ख़्वाब में अब के भी घर न रह जाए
Abhishek shukla
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ये जो हम तख़्लीक़-ए-जहान-ए-नौ में लगे हैं पागल हैं दूर से हम को देखने वाले हाथ बटा हम लोगों का
Abhishek shukla
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न उस ने हाथ लगाया न उस ने बातें कीं पड़े पड़े यूँँ ही ख़ुद में ख़राब हो गए हम
Abhishek shukla
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चलते हुए मुझ में कहीं ठहरा हुआ तू है रस्ता नहीं मंज़िल नहीं अच्छा हुआ तू है
Abhishek shukla
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