मैं हिज्र का मारा हुआ हूँ इस लिए मुझ को दुआएँ दे दवाई रहने दे
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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गर दिखाना है तो ता-उम्र दिखा ये जज़्बा एक दिन का ये तेरा इश्क़-ए-वतन ठीक नहीं
Nilesh Barai
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जैसे मीर-ओ-ग़ालिब और मोमिन की ग़ज़लें होती हैं मैं ने वैसे ही तुझ को दिल में संजोए रक्खा था।
Nilesh Barai
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तुम ने काले को कहा जबसे बहुत सुंदर रंग दौड़ के गोरे चले और हसीं-तर बनने
Nilesh Barai
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मुझे हर साथ तेरा छोड़ देना है बता, तू इस में मेरा साथ देगा क्या?
Nilesh Barai
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आज नहीं तो कल तुझ सेे भी निकलेगा तू ने गर मेरी आँखों में बोया आँसू ओ नादाँ इस में आया तो डूबेगा मेरी आँख से टपका है उस का आँसू
Nilesh Barai
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