जैसे मीर-ओ-ग़ालिब और मोमिन की ग़ज़लें होती हैं मैं ने वैसे ही तुझ को दिल में संजोए रक्खा था।
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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मैं हिज्र का मारा हुआ हूँ इस लिए मुझ को दुआएँ दे दवाई रहने दे
Nilesh Barai
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तिरा मिलना न मिलना और मुद्दा है तिरा सानी ही कम-अज़-कम नहीं मिलता
Nilesh Barai
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इसे तक़्सीर समझो या मिरी क़िस्मत मैं हर दिन एक क़ातिल खोज लेता हूँ।
Nilesh Barai
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दर्द इक भूल नहीं पाते हम और ईजाद किए जाते हैं
Nilesh Barai
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बाहर के हर काम को कर लेता हूँ मैं घर में तन-आसानी होने लगती है
Nilesh Barai
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