इसे तक़्सीर समझो या मिरी क़िस्मत मैं हर दिन एक क़ातिल खोज लेता हूँ।
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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जैसे मीर-ओ-ग़ालिब और मोमिन की ग़ज़लें होती हैं मैं ने वैसे ही तुझ को दिल में संजोए रक्खा था।
Nilesh Barai
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मैं हिज्र का मारा हुआ हूँ इस लिए मुझ को दुआएँ दे दवाई रहने दे
Nilesh Barai
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ग़मों में जी रहे है रिंद सारे खता मत पूछ याँ सागर गिरा है
Nilesh Barai
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इस सेे ज़्यादा और भयानक क्या ही होगा भूखा बच्चा पीता है बस बहता आँसू
Nilesh Barai
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ज़ीस्त आगे की अकेले ही बितानी है हमें हिज्र की आदत अभी से डाल लेनी चाहिये।
Nilesh Barai
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