ज़ीस्त आगे की अकेले ही बितानी है हमें हिज्र की आदत अभी से डाल लेनी चाहिये।
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इश्क़ अगर बढ़ता है तो फिर झगड़े भी तो बढ़ते हैं आमदनी जब बढ़ती है तो ख़र्चे भी तो बढ़ते हैं माना मंज़िल नहीं मिली है हम को लेकिन रोज़ाना एक क़दम उस की जानिब हम आगे भी तो बढ़ते हैं
Tanoj Dadhich
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तुम ने एहसान किया था जो हमें चाहा था अब वो एहसान जता दो तो मज़ा आ जाए
Jaun Elia
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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं
Abrar Kashif
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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ग़मों में जी रहे है रिंद सारे खता मत पूछ याँ सागर गिरा है
Nilesh Barai
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गर दिखाना है तो ता-उम्र दिखा ये जज़्बा एक दिन का ये तेरा इश्क़-ए-वतन ठीक नहीं
Nilesh Barai
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जैसे मीर-ओ-ग़ालिब और मोमिन की ग़ज़लें होती हैं मैं ने वैसे ही तुझ को दिल में संजोए रक्खा था।
Nilesh Barai
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आतिश-ए-ग़म से न जल जाए कहीं रूह फ़ौलाद किए जाते है
Nilesh Barai
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इस सेे ज़्यादा और भयानक क्या ही होगा भूखा बच्चा पीता है बस बहता आँसू
Nilesh Barai
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