आतिश-ए-ग़म से न जल जाए कहीं रूह फ़ौलाद किए जाते है
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उस के पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं
Jaun Elia
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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जैसे मीर-ओ-ग़ालिब और मोमिन की ग़ज़लें होती हैं मैं ने वैसे ही तुझ को दिल में संजोए रक्खा था।
Nilesh Barai
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मैं हिज्र का मारा हुआ हूँ इस लिए मुझ को दुआएँ दे दवाई रहने दे
Nilesh Barai
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ग़मों में जी रहे है रिंद सारे खता मत पूछ याँ सागर गिरा है
Nilesh Barai
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इस सेे ज़्यादा और भयानक क्या ही होगा भूखा बच्चा पीता है बस बहता आँसू
Nilesh Barai
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ज़ीस्त आगे की अकेले ही बितानी है हमें हिज्र की आदत अभी से डाल लेनी चाहिये।
Nilesh Barai
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