sherKuch Alfaaz

मैं क्या बताऊँ तुम को अपना हाल बेहद बुरा गुज़रा पुराना साल कहता हूँ अपने तजरिबे से सुन कम अक़लों की यारी जी का जंजाल

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा

Bashir Badr

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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है

Shabeena Adeeb

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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा

Santosh S Singh

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे

Tehzeeb Hafi

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न मेरा है न किसी और के बाप का सूरज है इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरज गुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हा के एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज

Amaan mirza

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नज़दीक में रखा मुझे तन्हा नहीं किया कइयों ने मुझ को चाहा पर अपना नहीं किया तुम ने भी भेज दी मेरी जानिब मशकक़तें सुलझे हुए को उलझा के अच्छा नहीं किया

Amaan mirza

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ये सच है मुझ को दिखते नहीं तेरे ऐब-ओ-ख़म दिखने लगी हैं ख़ूबियाँ तू है मुझे पसंद

Amaan mirza

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तुम्हारे साथ में जो गुज़री थी वो ज़िंदगी थी तुम्हारे बा'द ये क्या ज़िंदगी है? बिल्कुल नइँ ख़मोश रहने की आदत सी हो गई है मुझे भला ख़मोशी कभी बोलती है? बिल्कुल नइँ

Amaan mirza

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इज़्ज़त करूँँगा मैं भी रहूँगा लिहाज़ में तू चीख़ता रहेगा अगर एक साज़ में महफ़िल में अच्छी शा'इरी की क्या बढ़ी डिमांड कव्वे भी ख़ुद को गिनने लगे सरफ़राज़ में

Amaan mirza

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