मैं मंज़िल की तरफ़ हूँ और मोहब्बत मेरे रस्ते में फिर से आ रही है
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मतलब पता है आदमी को हुक्म का मगर औरत को ही गु़लाम का मतलब नहीं पता
Rohit tewatia 'Ishq'
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जवान एक बूढ़े से हँसकर ये बोला हुआ क्या जो ख़ूँ में उबाल अब नहीं है
Rohit tewatia 'Ishq'
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वो भी इक वक़्त था होती थी चमक आँखों में एक लड़की से मुझे प्यार हुआ करता था
Rohit tewatia 'Ishq'
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सभी के दिल की जब धड़कन हुआ था मैं खिले फूलों का जब आँगन हुआ था मैं
Rohit tewatia 'Ishq'
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नज़र में आ गया हूँ मैं किसी की अब उस के दिल पे क़ब्ज़ा हो रहा है
Rohit tewatia 'Ishq'
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