मैं मोहब्बत में नहीं पड़ता मगर अब के बरस आज़माना है मुझे अपना हुनर अब के बरस
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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इक रिवायत थी निभानी सो निभा दी मैं ने छोड़ कर जाते हुए ख़ूब दुआ दी मैं ने उस को बस इतना ही कह पाया कि ख़ुश रहना और दिल की दीवार से तस्वीर हटा दी मैं ने
Mukesh Jha
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तेरा बदन तो सलामत रहे मगर दिल को मेरे इन अश्कों की बारिश के बा'द ज़ंग लगे है इंतिक़ाम से मतलब मुझे तो रंग-ए-बहार ये बद-दुआ है मेरी तू ख़िज़ाँ का रंग लगे
Mukesh Jha
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इतनी शोहरत तो मेरी आज भी इस शहर में है एक पत्ता न हिले मेरी इजाज़त के बग़ैर
Mukesh Jha
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मैं कहीं गुम हूँ आजकल शायद जल गए होंठ चाय पीते हुए
Mukesh Jha
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जितना था सब गँवा दिया मैं ने इश्क़ भी, दोस्त भी, ज़माना भी
Mukesh Jha
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