मैं तमाम रात तड़पा मैं तमाम रात जागा कोई पास आ रहा है शब-ए-ग़म पिघल रही है
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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उस एक शख़्स को हम भूलने की कोशिश में न जाने कितनी दफ़ा उस को याद कर बैठे
Rakesh Mahadiuree
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मेरे बच्चे भी मुहब्बत में वफ़ा करते हैं मैं ने घर में कभी हथियार नहीं रक्खा है
Rakesh Mahadiuree
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शे'र मेरा सुन के अहल-ए-बज़्म तो ख़ामोश थी मेरे आगे लिखने वाले तब्सिरा करते रहे
Rakesh Mahadiuree
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मेरे शे'रों पे दाद आएँगी मत घबराइए साहब मुहब्बत करने वाले सब मेरा आलम समझते हैं
Rakesh Mahadiuree
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पहले सी दिल में हुस्न की चाहत नहीं बची देखा है हम ने हुस्न को इतने क़रीब से
Rakesh Mahadiuree
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