मैं तिरे हुस्न पे नहीं मरता मैं तिरी शा'इरी पे मरता हूँ इश्क़ तुझ सेे नहीं मगर जानाँ तेरी ग़ज़लों से इश्क़ करता हूँ
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये कहानी भी मुकम्मल हो न पाई दोस्तो इस कहानी में भी उस का दिल कोई और ले गया
ABhishek Parashar
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क़त्ल करना था तीरगी का सो दिल जला कर की रौशनी मैं ने
ABhishek Parashar
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शा'इरी तो पसंद है लेकिन उस को शाइ'र पसंद आते नहीं
ABhishek Parashar
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ये सादगी ये हुस्न ये लहजा तेरा कैसे मेरा दिल तेरा दीवाना न हो
ABhishek Parashar
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कौन है बे-वफ़ा ये पूछा तो आप का नाम ले रहे थे लोग
ABhishek Parashar
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