मर्ज़ी बिन उस की पत्ता भी नहीं हिलता अपना माना कैसे अपनी मर्ज़ी से
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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वो समुंदर है वो प्यासा ही रखेगा मैं सिमट जाऊँगा तुझ में ,हूँ मैं तालाब
"Dharam" Barot
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था मुश्त-ए-ख़ाक का ये जिस्म मुश्त-ए-ख़ाक बन जाना इसे आख़िर में जाना क़ब्र में या राख बन जाना
"Dharam" Barot
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वीडियो कॉल कर दिन निकालें जी आप मोह पाला है पैसों का परदेस में
"Dharam" Barot
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साथ चलने वाले सारे रुक गए थे ज़िंदगी को जल्द जाना था जिन्होंने
"Dharam" Barot
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साथ होता ही नहीं सब का यहाँ हौसला ही साथ होता था मेरा
"Dharam" Barot
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