मौजों से खेलने का हुनर आ गया 'बशर' साहिल भी मुझ सेे दूर बहुत दूर हो गया
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चल गया होगा पता ये आप को बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़ तू समझती क्या है अपने आप को
Kushal Dauneria
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वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया मैं इस मज़ाक़ को दिल से लगा के बैठ गया दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया
Zubair Ali Tabish
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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ख़ुद को मनवाने का मुझ को भी हुनर आता है मैं वो कतरा हूँ समुंदर मेरे घर आता है
Waseem Barelvi
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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कितने सैयारे ख़ला में घूमते इन पतंगों को उड़ाता कौन है
Dharmesh bashar
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यक़ीं मत कीजिए अख़बार की हर बात पर यूँँ ही बहुत मश्कूक होती हैं 'बशर' ये सुर्ख़ियाँ अक्सर
Dharmesh bashar
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तुझ से भी दूर ज़माने के तक़ाज़ों से भी दूर तेरा दीवाना ज़रा देख कहाँ जा निकला
Dharmesh bashar
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ये ज़िन्दगी तो हम को कभी की भुला चुकी अब क्या करें कि मौत भी आँखें चुराए है
Dharmesh bashar
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वो कहाँ रहते हैं जिन के ख़ातिर 'बशर' उम्र भर के लिए हम मुसाफ़िर रहे
Dharmesh bashar
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