मौत आने पर बदलती, रूह अपना पैरहन क्या पता था रूह मुझ को, छोड़ देगी जीते जी
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मौत का भी इलाज हो शायद ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं
Firaq Gorakhpuri
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रक़ीबों ने कहा मुझ सेे दिखाओ रूम तुम अपना किताबें ग़म उदासी और इक फ़ोटो मिली उन को
Rohit Gustakh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हम ने
Shariq Kaifi
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गवाही दे रहे हैं आँखों के काले घने घेरे तुम्हारी याद में कल रात भर जागी हुई हूँ मैं
Dr Bhagyashree Joshi
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सर आँखों पर रखते उठा कर तब मुझे सब मंदिर में जलती काठ की गर राख होती
Dr Bhagyashree Joshi
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बुला कर पास तू अपने सितारों की रिदा दे दे बहुत ही थक गई हूँ मैं मुझे सोना है अब मौला
Dr Bhagyashree Joshi
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ज़िन्दगी का कोई पल जब मुझ को बरहम सा लगा दोस्त बन कर तब मेरे तू दिल पे मरहम सा लगा
Dr Bhagyashree Joshi
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मुकम्मल हिज्र में काटी है उस ने ज़िन्दगी अपनी यहाँ कुछ लोग पल भर में मुहब्बत भूल जाते हैं
Dr Bhagyashree Joshi
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