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मिरे दिल को दुखाती हो चलो जानाँ दुखा लो तुम तुम्हें दिल को रिझाना है ख़ुशी से अब रिझालो तुम

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वो मेरे पास से वापस अगर आ कर नहीं जाता तो मेरी आँख से उस का कभी पैकर नहीं जाता जो उस के पास से होकर गुज़र जाए कभी तो फिर बसर कोई भी हो अपने सलामत घर नहीं जाता

Ali Nazim Adam

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मैं तो ये सोच भी नहीं सकता तेरे बिन तो मैं जी नहीं सकता हाथ में है तिरे लबों का जाम अपने होंटो को सी नहीं सकता

Ali Nazim Adam

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पहले तो उस को पढ़ाया बाप ने उस को पैरों पर जमाया बाप ने एक कर डाले थे अपने रात दिन धूप में ख़ुद को जलाया बाप ने

Ali Nazim Adam

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लोगों को अब तो चाहिए दौलत हराम की इज़्ज़त को कौन मानता है अपने काम की जिस को भी उस की आँख ने देखा है इक दफ़ा उस को नहीं कोई भी ज़रूरत है जाम की

Ali Nazim Adam

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मिल गई है आप को तो पीर की पगड़ी भी लेकिन मेरे हिस्से में मगर मेरी ख़लीफ़त भी नहीं है

Ali Nazim Adam

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