मेरे दुख को मुझ सेे ज़्यादा कौन समझा मेरा दुख भी बिल्कुल मुझ-सा हो रहा था
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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जिन हाथों से हो कश्मीर बनाते तुम काश उसी से हर तक़दीर बनाते तुम
Shobhit Dixit
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पहले दरवाजा खटकाया जाता था अब तो पहले फ़ोन मिलाया जाता है
Shobhit Dixit
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काग़ज़ की नाव बनाते थे और उस पर भी इतराते थे अब तो छुट्टी भर है बस तब दीवाली यार मनाते थे
Shobhit Dixit
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हम ने इक वहम पाल रखा है उस का ही तो मलाल रखा है टूटा था दिल तो एक दफ़ा बस वो दर्द अब तक सम्हाल रखा है
Shobhit Dixit
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हँसकर के कितना रोते हैं लड़के भी लड़के होते हैं
Shobhit Dixit
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