मेरी आँखों की नमी पर बात की है लगता है तेरी कमी पर बात की है ख़ूब-सूरत सोच है लड़की तुम्हारी तुम ने तो हर आदमी पर बात की है
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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तीरगी जैसे निकलती है दिए की रौशनी से एक दिन मैं भी चला जाऊँगा तेरी ज़िंदगी से
Neeraj Nainkwal
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वक़्त के साथ जो कल बदल सकते हैं आज ही मेरे दिल से निकल सकते हैं आप वापस नहीं लौटना चाहते आप बिल्कुल मेरे साथ चल सकते हैं
Neeraj Nainkwal
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आज, कल और अगले कल तक मुझ को रोना है अज़ल तक
Neeraj Nainkwal
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उस ने पूछा ही नहीं तब घर में आने के लिए मैं गया था पास जिस के दिल लगाने के लिए
Neeraj Nainkwal
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जाना चाहते नहीं मगर जाएँ शायद अब हम रोते-रोते घर जाएँ शायद तेरे जाने से भरे दरिया सूखे हैं हम वक़्त से पहले भी मर जाएँ शायद
Neeraj Nainkwal
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