तीरगी जैसे निकलती है दिए की रौशनी से एक दिन मैं भी चला जाऊँगा तेरी ज़िंदगी से
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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साल के तीन सौ पैंसठ दिन में एक भी रात नहीं है उस की वो मुझे छोड़ दे और ख़ुश भी रहे इतनी औक़ात नहीं है उस की
Muzdum Khan
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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तुम ने भी उन से ही मिलना होता है जिन लोगों से मेरा झगड़ा होता है तुम मेरी दुनिया में बिल्कुल ऐसे हो ताश में जैसे हुकुम का इक्का होता है
Zia Mazkoor
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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वक़्त के साथ जो कल बदल सकते हैं आज ही मेरे दिल से निकल सकते हैं आप वापस नहीं लौटना चाहते आप बिल्कुल मेरे साथ चल सकते हैं
Neeraj Nainkwal
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उस ने पूछा ही नहीं तब घर में आने के लिए मैं गया था पास जिस के दिल लगाने के लिए
Neeraj Nainkwal
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नज़्मों में ग़ज़लों में अच्छा लगता है इश्क़ मियाँ फिल्मों में अच्छा लगता है
Neeraj Nainkwal
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आसमाॅं में ख़्वाब कितने ही सजाती चल रही है मैं फ़क़त वो ख़ाक हूँ जो तू उड़ाती चल रही है
Neeraj Nainkwal
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मेरी आँखों की नमी पर बात की है लगता है तेरी कमी पर बात की है ख़ूब-सूरत सोच है लड़की तुम्हारी तुम ने तो हर आदमी पर बात की है
Neeraj Nainkwal
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