मिले थे कुछ गुलाब यूँँ भी उन किताबों से है ख़ुशबू अब भी बाक़ी उन हसीं गुलाबों से
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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हाल न पूछो मोहन का सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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वो अलग किरदार में दिखता है अब आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब देख कर दुख होता है दिल को मेरे झूठ हर अख़बार में दिखता है अब
Naviii dar b dar
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वो मुझ को याद भी क्या करता होगा अब ये हर दिन जिस की यादों में गुज़रता है
Naviii dar b dar
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पाने को इक हसीं ख़्वाब का वो नगर बस भटकता रहा यूँँ नवी दर-ब-दर
Naviii dar b dar
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वो मेरा ही बना अपना भी जिस तरह यारों हवाओं को भी तो इस की ख़बर नहीं थी यूँँ
Naviii dar b dar
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मेरी हर रात ख़ामोशी में गुज़री है दिल की भी बात ख़ामोशी में गुज़री है आज फिर से वही दिन यूँँ तन्हाई में और ये रात ख़ामोशी में गुज़री है
Naviii dar b dar
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