मिरे घर क्यूँँ ले आते हो गली बाज़ार की बातें चिढ़ाती हैं मुझे झूठे बिके अख़बार की बातें मुकरता है हमेशा तू किए वादे निभाने से तेरे वादे तिरी क़स में हुईं सरकार की बातें
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है
Azhar Iqbal
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आते आते मिरा नाम सा रह गया उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया
Waseem Barelvi
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कोई होंठों पे उँगली रख गया है उसी दिन से मैं लिखकर बोलता हूँ
Fahmi Badayuni
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ये भी मशहूर था कूचे में उस के जिसे तुम लोग पागल कह रहे हो
Rohit Gustakh
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तुम्हारी बज़्म हैं तो क्या करोगे इश्क़ को रुस्वा अदब से महफिलें चलती हैं हुक्मों से नहीं चलती
Rohit Gustakh
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बिना बात के हम लड़े जा रहे हैं कि नज़दीक आने मरे जा रहे हैं
Rohit Gustakh
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ग़म-ए-दुनिया से आगे कुछ नहीं है जहाँ तुम आशनाई कर रही हो
Rohit Gustakh
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इशारे में उस ने कहा मुस्कुरा कर इशारे से तुम को इशारा करेंगे
Rohit Gustakh
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