jab aadmi ko yeh na maa'loom ho ki uski naal kahaan gadi hai aur purkhon ki haddiyan kahaan dafn hain to money plant ki tarah ho jaata hai. jo mitti ke baghair sirf botalon mein phalta-phoolta hai.
Related Sher
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
489 likes
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
373 likes
कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
163 likes
हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
174 likes
उस को भुला कर मुझ को ये मालूम हुआ आदत कैसी भी हो छोड़ी जा सकती है
Nadeem Shaad
92 likes
More from Mushtaq Ahmad Yusufi
ज़ीस्त में मेरे उस ने अँधेरा किया और उस को सभी 'रौशनी' कहते थे
0 likes
ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
0 likes
तुझे पता नहीं मैं तेरा बाप लगता हूँ सलाम कर मुझे तू बात करने से पहले
0 likes
ये चंद बे-जान से ही अश'आर हैं मिरे प्यार के ख़ातिर मिरी ग़ज़ल एक बेवा के आँसुओं में इस तरह डूबी है
0 likes
सर झुका सकता नहीं कोई बुतों के आगे मेरे दिल में वो ख़ुदा है वो ख़ुदा रहने दो
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Mushtaq Ahmad Yusufi.
Similar Moods
More moods that pair well with Mushtaq Ahmad Yusufi's sher.







