मुहाफ़िज़ कर रहें हैं लाख तय्यारी मिटाने की हमें जो मिल नहीं पाया तुम्हारा हो नहीं सकता
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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यहाँ पर मसअला मुश्किल नहीं होता जुदा करना कभी तो आशिक़ों के हाल पर जा कर दुआ करना
Sagar Sahab Badayuni
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वो जिन्हें मंज़िल पहुँचना था कभी अब रास्ते से लौट कर घर जा रहें हैं
Sagar Sahab Badayuni
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मौत मुझ को साथ ले जाने खड़ी है बस परेशानी यही बीमार हूँ मैं
Sagar Sahab Badayuni
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किस के बुलाने पर चला आया यहाँ है कौन वो जिस का नज़ारा कट गया क्या एक टुकड़ा भी बचा सकता नहीं क्या दिल मिरा पूरा ख़ुदारा कट गया
Sagar Sahab Badayuni
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तुम लोग बस ऐसे उठा लेना जनाज़ा ये मिरा जैसे किसी डोली में दुल्हन को उठा कर चलते हैं
Sagar Sahab Badayuni
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