मुझ को भाती है उदासी मत हँसाओ रहने भी दो
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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फिर वही शाम याद आई है आज फिर रात तन्हा गुज़रेगी
Brajnabh Pandey
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ये मुहब्बत के मरे मारे हुए लोग इन से ही सीखा है रोना इस जहाँ में
Brajnabh Pandey
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हम नहीं इकलौते उस के प्यार में गुम यार उस दरिया के प्यासे और कई हैं
Brajnabh Pandey
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तुझ को मुहब्बत रास आने से रही ब्रज इस मुहब्बत में तू मारा जाएगा
Brajnabh Pandey
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मेरे दिल मान जा तू मुझ सेे यूँँ रूठा न कर हर बार वो जो तुझ को मनाता था वो कब का जा चुका है यार
Brajnabh Pandey
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