मुरव्वतन नदी की इब्तिदा थी कोहसार से जो आदतन समंदरो में जा मिली है प्यार से
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तुम धरा पर बैठ कर सपने गगन के पालते हो है विजय की चाह तो क्यूँ काम कल पर टालते हो और अंदाज़ा नदी का छोर पर मिलता नहीं है कूद कर देखो न डर क्यूँ डूबने का पालते हो
ATUL SINGH
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आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये
Meer Taqi Meer
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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पुरानी कश्ती को पार ले कर फ़क़त हमारा हुनर गया है नए खेवइये कहीं न समझें नदी का पानी उतर गया है
Uday Pratap Singh
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अभी से पाँव के छाले न देखो अभी यारो सफ़र की इब्तिदा है
Ejaz Rahmani
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ज़िंदगी इक ख़ूब-सूरत हादिसा है शक्ल मिट्टी की घड़ी बहती हवा है आँसुओं से तुम सदा दो आएगा वो हाल-ए-दिल वो जानता है वो ख़ुदा है
Raj Tiwari
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ज़िंदगी हर सबक़ सलीक़े से जाते जाते सिखाते जाती है
Raj Tiwari
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राज इस फ़ैसले पर ज़रा ग़ौर कर ज़िंदगी का सफ़र तन्हा कटता नहीं
Raj Tiwari
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तुम ने बस देखा है दिलों को सहरा होते हम ने देखा है आँखों को दरिया होते
Raj Tiwari
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मेरी और उस की कहानी एक सी है ग़ालिबन रो पड़ा है वो जो मेरी दास्ताँ सुनते हुए
Raj Tiwari
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