मुस्कुराता हुआ ये गुलशन-ए-आफ़ाक़ मिरा यहाँ हर शाम तेरी ख़ुशबू बिखर जाती है
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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इस लिए ये महीना ही शामिल नहीं उम्र की जंत्री में हमारी उस ने इक दिन कहा था कि शादी है इस फरवरी में हमारी
Tehzeeb Hafi
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मुझ को इस लफ़्ज़ का मतलब नहीं मालूम मगर आप की हम्म ने मुझे सोच में डाला हुआ है
Ammar Iqbal
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मुझे पत्थरों से गिला नहीं सभी फूल थे मिरे राज़दाँ सभी फूल से मिली ठोकरें हुआ हादसा मिरी राह में
Raj Tiwari
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मुस्कुराता हुआ इक चेहरा हमें याद आया शीशा देखा तो कोई अपना हमें याद आया
Raj Tiwari
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ज़ख़्मों को गुदगुदाते चलिए आप दर्द को यूँँ हँसाते चलिए आप
Raj Tiwari
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कल तलक ज़िंदगी की हक़ीक़त था जो आज वो शख़्स आँखों का इक ख़्वाब है
Raj Tiwari
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कभी बोझ आँसुओं का पलकों को ढोने नहीं देती ग़ज़ल महबूब है मेरी मुझे रोने नहीं देती
Raj Tiwari
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