na kisi aah ki aawaz na zanjir ka shor aaj kya ho gaya zindan mein ki zindan chup hai
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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हम ने हँस हँस के तेरी बज़्म में ऐ पैकर-ए-नाज़ कितनी आहों को छुपाया है तुझे क्या मालूम
Makhdoom Mohiuddin
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अब किसे है दिमाग़-ए-तोहमत-ए-इश्क़ कौन सुनता है बात फूलों की
Makhdoom Mohiuddin
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रात भर दर्द की शम्अ' जलती रही ग़म की लौ थरथराती रही रात भर
Makhdoom Mohiuddin
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आप की याद आती रही रात भर चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
Makhdoom Mohiuddin
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