न मालूम अब मिरा ग़म हो किसी को हुनर हॅंसने का सीखा इस लिए है दुखाया दिल किसी का भी न मैं ने मुझे वो दर्द देता किसलिए है
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा
Fahmi Badayuni
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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तिरे होंठों की खिलती हर हँसी तक कर गुल अब सीखेंगे खिलने का हुनर तुझ सेे
Manish Yadav
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मैं चाह के हर दर्द मिटा भी नहीं सकता कुछ दर्द हैं ऐसे जिन्हें रखना है सजा के
Manish Yadav
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तुम्हें वा'दा निभाना था अजल तक साथ जाना था किनारे आज बैठे हैं हमें तो डूब जाना था तुम्हें समझाऊॅं कितना मैं कहा कुछ भी न माना था ये तुम ने क्यूँ बचाया है उसे मुझ को डुबाना था
Manish Yadav
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सताते हैं ख़याल अब तेरे सारा दिन गुज़र जाती है यूँॅं ही रात रोने में
Manish Yadav
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रक्खे थे हिफाज़त से जो ख़त मैं ने वो सब आज वापस मैं यहाँ आया हूँ दरिया में बहा के
Manish Yadav
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