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नाम से एतिराज़ है शायद नाम लिख कर मिटा दिया जाए

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उस के पहलू में रात होती है बात करने पे बात होती है वैसे टाइम का कुछ पता तो नहीं हाँ मगर पौने सात होती है

Ankit Yadav

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मैं ने मोहब्बत की कभी ता'लीम तो ली ही नहीं लेकिन दिलों को तोड़ना आसान है मेरे लिए

Ankit Yadav

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वो जिस लिहाज़ से दुश्मन समझ रही है हमें हम उस लिहाज़ से तो वुल्वरीन होते हैं

Ankit Yadav

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आदमी जैसी किसी शय से मुलाक़ात हुई कल मेरी ख़ुद से बड़ी देर तलक बात हुई दिन यूँँ ही क़ैद रहा उस की ज़री ज़ुल्फ़ों में उस ने जब खोल दी ज़ुल्फ़ें तो कहीं रात हुई

Ankit Yadav

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कुछ इस अदास आज मेरी ओर देखती है वो कि लग रहा है मुद्दतों के बा'द में मिली है वो वो सोचती है मेरा पहला पहला इश्क़ है मगर अब उस से क्या कहूँ कि मेरा जिस्म आख़िरी है वो

Ankit Yadav

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