naqsha utha ke koi naya shahr dhundhiye is shahr mein to sab se mulaqat ho gai
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कोई चादर वफ़ा नहीं करती वक़्त जब खींच-तान करता है
Unknown
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कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझे आप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं
Zubair Ali Tabish
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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नक़्शा उठा के और कोई शहर देखिए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई
Nida Fazli
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ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र आख़िरी साँस तक बे-क़रार आदमी
Nida Fazli
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घी मिस्री भी भेज कभी अख़बारों में कई दिनों से चाय है कड़वी या अल्लाह
Nida Fazli
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कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है
Nida Fazli
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तुम भी लिखना तुम ने उस शब कितनी बार पिया पानी तुम ने भी तो छज्जे ऊपर देखा होगा पूरा चाँद
Nida Fazli
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