नज़र ने की शिकायत है बरस के गले से आ मिरे लग जा ज़रा तू
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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली' अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के
Ali Zaryoun
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रास्ते में फिर वही पैरों का चक्कर आ गया जनवरी गुज़रा नहीं था और दिसंबर आ गया
Rahat Indori
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मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के, ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से, मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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नज़र से नज़र को मिलाओ तो जानूँ लबो पे लबो को सजाओ तो जानूँ अगर मुझ से करते हो इतनी मोहब्बत मोहब्बत मैं मर कर दिखाओ तो जानूँ
Krishnavat Ritesh
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ये सावन ,माह ये ज़ुल्मी जवानी ज़माने बा'द सब कच्चा लगेगा
Krishnavat Ritesh
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मेरे मालिक मेरे मौला तेरा बस इक सहारा हो जहाँ को जीत लाऊँ मैं तेरा बस इक इशारा हो
Krishnavat Ritesh
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ये माथे पे जो कुमकुम है ये कानों में जो बाली है मेरे गर्दन में जो चमके वही कुंदन बना लूँगा
Krishnavat Ritesh
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फ़िक्र से बे-फ़िक्र थे अब फ़िक्र है घेरे हुए वो ज़माना और था अब ये ज़माना और है
Krishnavat Ritesh
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