ओ ख़ुदा के बंदे तू रोता कहाँ है पत्थरों के पास दिल होता कहाँ है
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे?
Zubair Ali Tabish
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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उठाओ कैमरा तस्वीर खींच लो इन की उदास लोग कहाँ रोज़ मुस्कराते हैं
Malikzada Javed
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मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है इश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोई दिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है
Vishal Singh Tabish
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साथ में मस्ज़िद का मेहमान चला जाएगा जैसे ही माहे रमज़ान चला आएगा
Irshad Siddique "Shibu"
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पुराने महल टूटता देख कर मुझे बूढ़ा होने से डर लगता है
Irshad Siddique "Shibu"
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भले किसी के भी लिए मैं रस्ता नइँ बना मगर किसी के रास्ते में काँटा नइँ बना
Irshad Siddique "Shibu"
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उस की हर मर्ज़ी में मैं शामिल हुआ फिर भी मेरा इश्क़ ना-कामिल हुआ
Irshad Siddique "Shibu"
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साहब हम जिस दिन से कमाने लग जाऍंगे ये चार लोग भी पाॅंव दबाने लग जाऍंगे मेरी ओर ख़़ुदा-रा यूँॅं ना देखा कीजे लोग वगरना बात बनाने लग जाऍंगे
Irshad Siddique "Shibu"
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