ओछा तेरा लगने लगा रंग-ए-जहाँ रंगो का कारोबार देखा यार में
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ये बहस छोड़ कि कितनी हसीन है दुनिया तू ये बता कि तेरा दिल कहीं लगा कि नहीं
Vijay Sharma
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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सारी रात लगाकर उसपर नज़्म लिखी और उस ने बस अच्छा लिखकर भेजा है
Zahid Bashir
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उस ने देखा मुझ को तो कुण्डी लगानी छोड़ दी फिर मिरे होंठों पे इक आधी कहानी छोड़ दी मैं छुपाए फिर रहा था इश्क़ अपने गाँव में और फिर ज़ालिम ने गर्दन पे निशानी छोड़ दी
nakul kumar
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चाँदनी का साथ केवल रात भर मैं तेरा जाना भी जानाँ सह गया
nakul kumar
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उम्र भर मैं ने की है इबादत तिरी इश्क़ की तब हुई है इनायत तिरी
Rizwan Khoja "Kalp"
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तू ने ग़ैरों की कही बातें सुनी अपना सच हम से सुनाना रह गया
Rizwan Khoja "Kalp"
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साहिब-ए-मसनद ग़ुलामी चाहते हैं शाह वाले सर झुका के अब चला कर
Rizwan Khoja "Kalp"
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शोहरत क्या बख़्शेगी हमें दुनिया जो ख़ुद नाकारी है
Rizwan Khoja "Kalp"
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पेड़ गिन काटी थी राहें ख़र्च गिन कर कट रही है अम्न की उम्मीद में हैं और नफ़रत बट रही है
Rizwan Khoja "Kalp"
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