उम्र भर मैं ने की है इबादत तिरी इश्क़ की तब हुई है इनायत तिरी
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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शोहरत क्या बख़्शेगी हमें दुनिया जो ख़ुद नाकारी है
Rizwan Khoja "Kalp"
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नफ़रत भरी इस दुनिया में हम प्यार के व्यापारी हैं
Rizwan Khoja "Kalp"
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रौशनी मत कर चराग़ों के सहारे कर उजाला नूर-ए-ईमाँ को जला कर
Rizwan Khoja "Kalp"
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शाना-ब-शाना हैं खड़े दर पे तिरे छोटा बड़ा कोई नहीं दरबार में
Rizwan Khoja "Kalp"
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रौशन नज़र आता है मजलिसों में वो शख़्स रातों का जला हुआ है
Rizwan Khoja "Kalp"
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