रौशनी मत कर चराग़ों के सहारे कर उजाला नूर-ए-ईमाँ को जला कर
Related Sher
तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
130 likes
हम इक ही लौ में जलाते रहे ग़ज़ल अपनी नई हवा से बचाते रहे ग़ज़ल अपनी दरअस्ल उस को फ़क़त चाय ख़त्म करनी थी हम उस के कप को सुनाते रहे ग़ज़ल अपनी
Zubair Ali Tabish
68 likes
कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
Nida Fazli
54 likes
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
Bashir Badr
66 likes
इस दौर-ए-सियासत का इतना सा फ़साना है बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है
Unknown
85 likes
More from Rizwan Khoja "Kalp"
तू ने ग़ैरों की कही बातें सुनी अपना सच हम से सुनाना रह गया
Rizwan Khoja "Kalp"
0 likes
उम्र भर मैं ने की है इबादत तिरी इश्क़ की तब हुई है इनायत तिरी
Rizwan Khoja "Kalp"
0 likes
शोहरत क्या बख़्शेगी हमें दुनिया जो ख़ुद नाकारी है
Rizwan Khoja "Kalp"
0 likes
शाना-ब-शाना हैं खड़े दर पे तिरे छोटा बड़ा कोई नहीं दरबार में
Rizwan Khoja "Kalp"
0 likes
पेड़ गिन काटी थी राहें ख़र्च गिन कर कट रही है अम्न की उम्मीद में हैं और नफ़रत बट रही है
Rizwan Khoja "Kalp"
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Rizwan Khoja "Kalp".
Similar Moods
More moods that pair well with Rizwan Khoja "Kalp"'s sher.







