पहले याद आती हैं तो रोती हैं आँखें फिर कहीं जा कर ज़रा सोती हैं आँखें हर नज़र में क़ैद हैं मंज़र कई से ख़्वाबों की लाशें फ़क़त ढोती हैं आँखें
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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शदीद उलझनें सब ख़्वाहिशें जला रही हैं अजीब हाल है मेरा समझ नहीं आता यूँँ ज़िंदा रहना भी क्या कोई बेवक़ूफ़ी है या कोई कमाल है मेरा समझ नहीं आता
Nakul kumar
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इक लड़की जो मेरी दुनिया थी और वो भी दुनिया जैसी निकली
Nakul kumar
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तू चाहिए कि मुकम्मल ही चाहिए मुझ को तिरा ये जिस्म भी मेरा हो और तेरा दिल भी
Nakul kumar
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इस क़दर दिल सहे ज़द ठीक नहीं इश्क़ की इतनी भी हद ठीक नहीं बंद कमरे से निकल आ बाहर दर्द की इतनी मदद ठीक नहीं
Nakul kumar
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लोग तो बस जिस्मों पर बनवाते फिरते हैं लेकिन तेरे नाम का टैटू मैं ने दिल पर बनवाया था
Nakul kumar
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