पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा
Related Sher
भेज देता हूँ मगर पहले बता दूँ तुझ को मुझ से मिलता नहीं कोई मिरी तस्वीर के बा'द
Umair Najmi
96 likes
के 'हैलो' सुनते ही कट कर दिया है उस ने मेरा फ़ोन ख़ुदा का शुक्र है आवाज़ तो पहचानता है वो
Zubair Ali Tabish
77 likes
दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
53 likes
ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
130 likes
तुझे कौन जानता था मेरी दोस्ती से पहले तेरा हुस्न कुछ नहीं था मेरी शा'इरी से पहले
Kaif Bhopali
51 likes
More from Rais Amrohvi
किस ने देखे हैं तिरी रूह के रिसते हुए ज़ख़्म कौन उतरा है तिरे क़ल्ब की गहराई में
Rais Amrohvi
8 likes
हम अपने हाल-ए-परेशाँ पे बारहा रोए और उस के बा'द हँसी हम को बारहा आई
Rais Amrohvi
15 likes
और बढ़ जाती है कुछ लफ़्ज़-ओ-बयाँ की तासीर लफ़्ज़ जब अश्क की सूरत में अदा होता है
Rais Amrohvi
8 likes
टहनी पे ख़मोश इक परिंदा माज़ी के उलट रहा है दफ़्तर
Rais Amrohvi
16 likes
ख़ामोश ज़िन्दगी जो बसर कर रहे हैं हम गहरे समुंदरों में सफ़र कर रहे हैं हम
Rais Amrohvi
21 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Rais Amrohvi.
Similar Moods
More moods that pair well with Rais Amrohvi's sher.







