टहनी पे ख़मोश इक परिंदा माज़ी के उलट रहा है दफ़्तर
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वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीक़े से मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता
Waseem Barelvi
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है
Waseem Barelvi
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जाने से कोई फ़र्क़ ही उस के नहीं पड़ा क्या क्या समझ रहा था बिछड़ने के डर को मैं
Shariq Kaifi
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किस ने देखे हैं तिरी रूह के रिसते हुए ज़ख़्म कौन उतरा है तिरे क़ल्ब की गहराई में
Rais Amrohvi
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और बढ़ जाती है कुछ लफ़्ज़-ओ-बयाँ की तासीर लफ़्ज़ जब अश्क की सूरत में अदा होता है
Rais Amrohvi
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हम अपने हाल-ए-परेशाँ पे बारहा रोए और उस के बा'द हँसी हम को बारहा आई
Rais Amrohvi
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पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा
Rais Amrohvi
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ख़ामोश ज़िन्दगी जो बसर कर रहे हैं हम गहरे समुंदरों में सफ़र कर रहे हैं हम
Rais Amrohvi
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