पराई बाँह में रातें बिता कर जब कभी दिन में हमें टीवी पे देखोगे तो सोचो कितना रोओगे
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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छुआ है तुम ने भी इक रोज़ हम को ये ख़ुशबू देर तक महका करेगी तुम्हारे हाथ सालों तक ये दुनिया हमारे नाम पे चूमा करेगी
Ritesh Rajwada
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तेरा पीछा करते करते जाने क्यूँ मैं दुनियादारी से पीछे छूट गया तू ने तो ऐ जान महज़ दिल तोड़ा था तू क्या जाने मैं अंदर तक टूट गया
Ritesh Rajwada
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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है
Ritesh Rajwada
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जिन रस्तों से तुम गुज़रे हो उन रस्तों को ईद मुबारक़
Ritesh Rajwada
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है लग रहा है घुले हुए हो तुम
Ritesh Rajwada
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