परिंदे होते तो डाली पर लौट भी जाते हमें न याद दिलाओ कि शाम हो गई है
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
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अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
Tehzeeb Hafi
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इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
Vikram Gaur Vairagi
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दोस्तों का क्या है वो तो यूँँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त रोज़ इक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ
Rajesh Reddy
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धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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आसमाँ ने बंद कर लीं खिड़कियाँ अब ज़मीं में उस की दिलचस्पी नहीं
Rajesh Reddy
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नई लाशें बिछाने के लिए ही गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं
Rajesh Reddy
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बना कर हम ने दुनिया को जहन्नुम ख़ुदा का काम आसाँ कर दिया है
Rajesh Reddy
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