पूछ रहे हैं मुझ सेे पेड़ों के सौदागर आब-ओ-हवा कैसे ज़हरीली हो जाती है
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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किसी को ढूँडते हैं हम किसी के पैकर में किसी का चेहरा किसी से मिलाते रहते हैं
Alam Khursheed
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कभी कभी कितना नुक़सान उठाना पड़ता है ऐरों ग़ैरों का एहसान उठाना पड़ता है
Alam Khursheed
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दोस्तों के साथ चलने में भी ख़तरे हैं हज़ार भूल जाता हूँ हमेशा मैं सँभल जाने के बा'द अब ज़रा सा फ़ासला रख कर जलाता हूँ चराग़ तजरबा ये हाथ आया हाथ जल जाने के बा'द
Alam Khursheed
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हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ मैं भीड़ बहुत है इस मेले में खो सकता हूँ मैं
Alam Khursheed
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तब्दीलियों का नश्शा मुझ पर चढ़ा हुआ है कपड़े बदल रहा हूँ चेहरा बदल रहा हूँ
Alam Khursheed
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