पूछती है सच बताएँ, गर किसी से इश्क़ है सच तो ये है, हाँ मुझे अब हर किसी से इश्क़ है फिर रहा है बेटी के रिश्ते के ख़ातिर क्यूँ वो बाप पूछ लेता काश, ऐ दुख़्तर, किसी से इश्क़ है
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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जब कभी ज़ख़्म तेरे भरने लगें याद करना मुझे अकेले में
Adnan Ali SHAGAF
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तेरे बा'द इस क़दर मैं रोया हूँ लोग मुझ को नदी बुलाते हैं
Adnan Ali SHAGAF
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सीने में तो काँटे ही नहीं हैं दिल में फिर ये चुभन क्यूँ है माना कि ख़ुदा है साथ मेरे फिर भी ये अकेलापन क्यूँ है
Adnan Ali SHAGAF
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ख़ुदा के दर से तुझे इस अदास माँगा है कि हाथ उठा के नहीं सर झुका के माँगा है
Adnan Ali SHAGAF
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कुछ कर नहीं रहे तो इक काम कीजिएगा बाँहों में आके मेरे आराम कीजिएगा
Adnan Ali SHAGAF
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